Wednesday, 13 February 2013



३॰ व्यवसाय में सफलता के लिए आप जब होली जल जाए, तब आप होलिका की थोड़ी-सी अग्नि ले आएं । फिर अपने दुकान एवं व्यवसाय स्थल के आग्नेय कोण में उस अग्नि की मदद से सरसों के तेल का दीपक जला दें । इस उपाय से आपके दुकान व व्यवसाय स्थल की सारी नकारात्मक ऊर्जा जलकर समाप्त हो जाएगी । इससे आपके दुकान एवं व्यवसाय में सफलता मिलेगी ।


॰ यदि आप किसी प्रकार की आर्थिक समस्या से ग्रस्त हैं, तो होली पर यह उपाय अवश्य करें । होली की रात्रि में चन्द्रोदय होने के बाद अपने निवास की छत पर अथवा किसी खुले स्थान पर आ जाएं । फिर चन्द्रदेव का स्मरण करते हुए चाँदी की एक प्लेट में सूखे छुहारे तथा कुछ मखाने रखकर शुद्ध घी के दीपक के साथ धूप एवं अगरबत्ती अर्पित करें । अब दूध से अर्घ्य प्रदान करें । अर्घ्य के बाद कोई सफेद प्रसाद तथा केसर मिश्रित साबूदाने की खीर अर्पित करें । चन्द्रदेव से आर्थिक संखट दूर कर समृद्धि प्रदान करने का निवेदन करें । बाद में प्रसाद और मखानों को बच्चों में बांट दें । आप प्रत्येक पूर्णिमा को चन्द्रदेव को दूध का अर्घ्य अवश्य दें । कुछ ही दिनों में आप अनुभव करेंगे कि आर्थिक संकट दूर होकर समृद्धि बढ़ रही है ।


धन कमाना बुरी बात नहीं है। धन खूब कमाओ, नंबर एक से कमाओ, नंबर 2 से कमाओ, लेकिन बस इस बात का होश रखो कि धन कमा क्यों रहे हो। चार बातों पर गौर करें तो जीवन में किसी प्रवचन सुनने की जरूरत ही नहीं पडेगी। -मैं कौन हूं। -पृथ्वी पर क्यों आया हूं। -कर क्या रहा हूं। -जाना कहां पर है। आवश्यकता की पूर्ति के लिए धन कमाएं। लेकिन आवश्यकता व इच्छा में भेद को भी बखूबी जानें। जीवन में समस्या सुनने की है। कोई किसी की सुनता ही नहीं है। प्रभु की सुन लो, बस सुनने मात्र से ही बेडा पार हो जाएगा। मनुष्य की जिंदगी में आवश्यकता घटती जा रही है, लेकिन इच्छाएं बढती जा रही है। रसोई में बेशक सामानों की सूची धीरे-धीरे कम हो रही है, लेकिन बाथरूम में रंग बिरंगे फैशन के सामानों की ढेर लग रहे हैं। चौबीस घंटे चिंता में डूबा रहता है। संपन्नता तो बहुत है, लेकिन इच्छा की पूर्ति कुबेर भी नहीं कर सकता है। भगाने व घर छोडने से भगवान नहीं मिलता है। दुनिया में एक भी विरक्त व्यक्ति को भगवान का दर्शन नहीं हुआ। रैदास, कबीरदास, चैतन्य, कर्माबाई, मीराबाई, ज्ञानदेव व लाख साहित जितने भी महापुरुष हुए, गृहस्थी में ही भगवान से साक्षात्कार हुआ। भगवान गृहस्थी में ही मिलते हैं। भगवान के दर्शन के लिए वृंदावन व आयोध्या भागने की जरूरत नहीं है। बस चार बातों का गांठ बांधकर जागिए, भागिए नहीं। आपका कल्याण हो जाएगा। भजन में स्वार्थ व संसार के व्यवहार में परमार्थ चाहिए। पहले बांटिए तब खाने की कोशिश कीजिए। परिवार एक बस अड्डे के समान है। सवारी अच्छी होगी, तो यात्रा भी सुखद होगी। चार बातों पर गौर करेंगे तो बुराई स्वयं छोडकर चली जाएगी।

No comments:

Post a Comment