Thursday, 28 February 2013

नारी की दुश्मन नारी ही होती हे जब घर में कन्या जनम लेती हे तो सबसे पहले माँ ही कहती हे की बुरा हुआ जो लड़की हुई  ,लड़का होता तो अच्छा होता ,समाज में ज्यादातर लोग कन्या के जनम को शुभ नहीं मानते .

घर में ही देखने में आता हे की लड़के को ज्यादा   महत्व देते हे कोई भी काम हो ,खाने ,पिने ,खेलने या आराम का ही क्यों ना हो ,लड़की को नहीं देते ,कहते  हे  की लड़की पराया धन होती हे ,

लड़की घर का काम करने के बाबजूद भी पढाई में अव्वल आती हे और सब की सेवा भी करती हे

वही लड़की जब बहु बनकर घर में आती हे तो सास ,ननद उस पर हर तरह के प्रतिबन्ध लगाते हे और उसके पति को भड़काती  हे बस यही से कन्या के बुरे दिन चालू हो जाते हे

आपने देखा होगा की नारी ही अंग प्रदर्शन करती हे फिल्मो में या अन्य विगापनों में अपनी मर्जी से वर्ना किसी की हिम्मत नहीं की नारी से अंग  प्रदर्शन  करवा सके ,

आज की नारी स्वंत्र भी हो गयी और अपने उपर किसी का स्वामित्व नहीं चाहती ,नारी के लिए आज उसका केरियर पहले हे ना की परिवार ,तो बहुत से कारण हे ऐसे ,यदि नारी चाहे तो बहुत कुछ बदल सकता हे लेकिन उसके लिए कथनी और करनी सामान होनी चाहिए .

राम नरेश गुप्ता  २ ८ ६    विवेक विहार सोडाला जयपुर 

No comments:

Post a Comment