प्रतिदिन प्रात: स्नानादि से निवृत्त होने के पश्चात एक तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरें और उस जल में 11 बीज लाल मिर्च के डाल दें। इसके बाद उक्त जल को सूर्य को अर्पित करें।
अर्पित करते वक्त 'ॐ आ
दित्याय नमः' का जाप करते हुए सूर्य भगवान से धन वापिसी की प्रार्थना करें।
जिस स्थान पर होली जलनी हो, उस स्थान पर एक छोटा-सा गड्ढा खोदकर उसमें तीन अभिमंत्रित गोमती चक्र तथा तीन कौड़ियां दबा दें। फिर मिट्टी में लाल गुलाल व हरा गुलाल मिलाकर उस गड्ढे को भरकर उसके ऊपर पीले गुलाल से कर्जदार का नाम लिख दें।
जब होली जले तब आप पान के पत्ते पर 3 बतासे, घी में डुबोया एक जोड़ा लौंग, तीन बड़ी इलायची, थोड़े-से काले तिल व गुड़ की एक डली रखकर तथा सिन्दूर छिड़ककर पान के पत्ते से ढंक दें।
अब सात परिक्रमा करते हुए प्रत्येक बार निम्न मंत्र का जप करके एक-एक गोमती चक्र होलिका में डालते जाएं -
'ल्रीं ल्रीं फ्रीं फ्रीं अमुक कर्ज विनश्यते फट् स्वाहा'। यहां अमुक के स्थान पर कर्जदार का नाम लें। परिक्रमा करने के बाद प्रणाम करके वापस आ जाएं।
अहकूटा भयत्रस्तै:कृता त्वं होलि बालिशै: अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम:
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