साम्प्रदायिकता एक अभिशाप है इसका मतलब होता है– संप्रदाय + इक + ता अर्थात किसी एक ही संप्रदाय, जाति, धर्म, क्षेत्र,रंग अथवा भाषा के प्रति रूढ़िवादी हो जाना भी एक साम्प्रदायिकता है . किसी भी व्यक्ति को सम्प्रदयिकताके चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए .
साम्प्रदायिकता है – अपनी पूजा-पाठ-उपासना-विधियों , खान-पान,रहन-सहन के तौर-तरीकों , जाति-नस्ल आदि की भिन्नताओं को ही धर्म का आधार मानना तथा अपनी मान्यता वाले धर्म को सर्वश्रेष्ठ और दूसरी मान्यता वाले धर्मों को निकृष्ट समझना , उनके प्रति नफरत , द्वेष-भाव पालना और फैलाना ।आतंकवाद साम्प्रदायिकता के कारण बढ़ रहा है आज नतीजा यह के देश में किसी के घर बम फटता है तो अगर वोह हिन्दू होता है तो हिन्दू आतंकवाद का नतीजा बताया जाता है अगर वोह मुस्लिम होता है तो मुस्लिम आतंकवाद का नतीजा बताया जाता है नहीं तो सिक्ख आतंकवाद बता दिया जाता है
इसलिए इससे बचने के लिए सब को मिल जुल कर काम करना होगा साथ में कथनी और करनी सामान रखनी होगी
राम नरेश गुप्ता 286 विवेक विहार सोडाला जयपुर
साम्प्रदायिकता है – अपनी पूजा-पाठ-उपासना-विधियों , खान-पान,रहन-सहन के तौर-तरीकों , जाति-नस्ल आदि की भिन्नताओं को ही धर्म का आधार मानना तथा अपनी मान्यता वाले धर्म को सर्वश्रेष्ठ और दूसरी मान्यता वाले धर्मों को निकृष्ट समझना , उनके प्रति नफरत , द्वेष-भाव पालना और फैलाना ।आतंकवाद साम्प्रदायिकता के कारण बढ़ रहा है आज नतीजा यह के देश में किसी के घर बम फटता है तो अगर वोह हिन्दू होता है तो हिन्दू आतंकवाद का नतीजा बताया जाता है अगर वोह मुस्लिम होता है तो मुस्लिम आतंकवाद का नतीजा बताया जाता है नहीं तो सिक्ख आतंकवाद बता दिया जाता है
इसलिए इससे बचने के लिए सब को मिल जुल कर काम करना होगा साथ में कथनी और करनी सामान रखनी होगी
राम नरेश गुप्ता 286 विवेक विहार सोडाला जयपुर
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