इधर धारी देवी का 800 साल पुराना मंदिर हटा, उधर केदारनाथ में बादल फटा?
बांध बनाने के लिए मंदिर को हटाने के बाद ही कुदरत के कहर की शुरूआत हुई। जब आसमान से बारिश कयामत बनकर गिरी, ग्लेशियर फटने लगे तो उफान मारती नदियों ने किसी को नहीं बख्शा। गंगा के इस गुस्से से, इस रौद्र रूप से, इस क्रोध से भगवान भी अछूते नहीं रहे।
पिछले 800 साल से धारी देवी अलकनंदा के बीच बैठकर नदी की धार को काबू में रखती थीं। 16 जून को स्थानीय लोगों के विरोध और हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ धारी देवी का मंदिर नदी के बीच से हटाकर उपर सुरक्षित जगह पर लाया गया। वजह बताई गई कि जब डैम से पानी छोड़ा जाएगा तो मंदिर डूब जाएगा। 16 जून की शाम यानि तकरीबन वही वक्त जब केदारनाथ में बादल फटा।
बांध बनाने के लिए मंदिर को हटाने के बाद ही कुदरत के कहर की शुरूआत हुई। जब आसमान से बारिश कयामत बनकर गिरी, ग्लेशियर फटने लगे तो उफान मारती नदियों ने किसी को नहीं बख्शा। गंगा के इस गुस्से से, इस रौद्र रूप से, इस क्रोध से भगवान भी अछूते नहीं रहे।
पिछले 800 साल से धारी देवी अलकनंदा के बीच बैठकर नदी की धार को काबू में रखती थीं। 16 जून को स्थानीय लोगों के विरोध और हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ धारी देवी का मंदिर नदी के बीच से हटाकर उपर सुरक्षित जगह पर लाया गया। वजह बताई गई कि जब डैम से पानी छोड़ा जाएगा तो मंदिर डूब जाएगा। 16 जून की शाम यानि तकरीबन वही वक्त जब केदारनाथ में बादल फटा।
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