अब नहीं सुनाई देगी वो आवाज, ‘बाबूजी तार आया है!’
तार’ से दो ही तरह की खबरें आती थी- या तो अच्छी या बुरी। यदि खुशखबरी होती थी, तो उसी वक्त पूरे मोहल्ले में मिठाई बांटी जाती थी, और यदि किसी के निधन की, मौत की खबर होती थी, कोई बुरा समाचार होता था, तो पूरा मोहल्ला गमगीन हो जाता था। वो दृश्य १५ जून, २०१३ से अब कहीं देखने को नहीं मिलेगा, क्योंकि अब नहीं सुनाई देगी वो आवाज, ‘बाबूजी तार आया है!’
‘तार’ या टेलीग्राम सेवा की शुरुआत अंग्रेजों ने भारत में की थी। बताया जाता था कि 1850 में सबसे पहले कलकत्ता (अब कोलकाता) से डायमंड हॉर्बर तक टेलीग्राम भेजा गया था। फिर कलकत्ता से डॉयमंड हॉर्बर के बीच 27 मील लंबी टेलीग्राम लाइन डाली गई। वैसे तो टेलीग्राम का अविष्कार सैमुअल एफबी मॉर्स ने अमेरिका में किया था, लेकिन भारत में इसकी शुरुआत एक सर्जन ने की थी। तब के अंग्रेज गर्वनर लॉर्ड डलहौजी इससे इतना प्रभावित हुए कि पूरे देश में टेलीग्राम लाइन डालने की शुरुआत का आदेश दे दिया।
यदि ‘तार’ नहीं होते, तो हम 15 अगस्त 1947 के बदले 1857 में ही आजाद हो चुके होते।
भारत सरकार ने फैसला किया है कि १५ जून, २०१३ से टेलीग्राम सेवाएं समाप्त कर दी जाएगी।
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