हिन्दी फिल्म के एक वयोवृद्ध कलाकार प्राण के निधन पर गहरा शोक प्रकट किया है।
प्रख्यात चरित्र अभिनेता प्राण का शुक्रवार को निधन हो गया। अस्वस्थ प्राण को लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उन्होंने रात 8.30 बजे अंतिम सांस ली। वह 93 वर्ष के थे। प्राण को इस साल दादा साहेब फाल्के अवार्ड से सम्मानित किया गया था। प्राण ने 40 के दशक में अपना फिल्मी करियर शुरू किया
#प्राण का वास्तविक नाम प्राण किशन सिकन्द है।
#प्राण एक्टर नहीं बल्कि फोटोग्राफर बनना चाहते थे। उन्होंने सबसे पहले अपने शहर की रामलीला में सीता का किरदार निभाया था।
#प्राण की पहली फिल्म पंजाबी में थी। फिल्म का नाम था यमला जट जो 1940 में आई थी।
#प्राण ने हिंदी और पंजाबी फिल्मों के अलावा बंगाली फिल्मों में भी काम किया था।
#भारत की आजादी से एक दिन पहले यानि 14 अगस्त 1947 को प्राण लाहौर से पाकिस्तान आए थे। प्राण के मुताबिक विभाजन के वक्त जो सबसे कीमती चीज उन्होंने खोई थी वो उनका कुत्ता था।
#प्राण को मुंबई आने के बाद पहली बार हिंदी फिल्म में मौका लेखक सआदत हसन मंटो की मदद से मिला था। फिल्म थी 1948 में आई देवानंद और कामिनी कौशल स्टारर जिद्दी।
#मुंबई आने के बाद प्राण की पहली सबसे बड़ी हिट फिल्म थी बीआर चोपड़ा की अफसाना (1951)
#प्राण और अशोक कुमार ने एक साथ करीब 30 फिल्मों में काम किया। दोनों काफी करीबी दोस्त माने जाते थे।
#कई नेगेटिव रोल निभाने के बाद 1967 में मनोज कुमार ने फिल्म उपकार में उन्हें एक विकलांग का किरदार निभाने का मौका दिया।
#प्राण ने धार्मिक फिल्म लव कुश में वाल्मिकी का किरदार भी निभाया।
#प्राण अपने मेकअप का खास ध्यान रखते थे और अपने घर पर आर्टिस्ट से अपना स्केच बनवाते थे उसके बाद अपना लुक तय करते थे।
#फिल्म जंजीर में अमिताभ बच्चन को लेने की सलाह प्राण ने ही प्रकाश मेहरा को दी थी।
#1969 से 1982 तक प्राण की कामयाबी का ऐसा दौर भी आया जब उन्हें फिल्म के विलेन से भी ज्यादा पैसे दिए जाने लगे। उस दौर में उन्हें अमिताभ बच्चन, विनोद खन्ना और शत्रुघ्न सिन्हा दैसे बड़े सितारों से भी ज्यादा फीस मिलती थी।
#1990 के बाद प्राण ने फिल्मों में काम करना लगभग बंद कर दिया। लेकिन अमिताभ बच्चन के विशेष आग्रह पर उन्होंने फिल्म मृत्युदाता और तेरे मेरे सपने में काम किया।
#प्राण का एक फुटबॉल क्लब भी है जिसका नाम बॉम्बे डायनामोज फुटबॉल क्लब है।
#प्राण अक्सर अपनी फिल्मों में एक शब्द का जरुर इस्तेमाल करते थे। ये शब्द था बर्खुरदार। कहते हैं ये उनका पसंदीदा शब्द है।
#2001 में प्राण को पद्मभूषण से सम्मानित किया गया और अब उन्हें दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा।
#प्राण ने अपने किरदारों को इतनी शिद्दत से निभाया कि लोग मानने लगे कि वो निजी जिंदगी में भी विलेन ही हैं। यहां तक की जिस दौर में प्राण हिट हुए लोगों ने अपने बच्चों का नाम प्राण रखना बंद कर दिया था। प्राण नाम के बच्चे की खोज के लिए बाकायदा एक प्रतियोगिता भी रखी गई थी।
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