गुरुवार: जिन लोगों का जन्म गुरुवार के दिन हुआ है वे बुद्धिमान होते हैं। पराक्रमी होते हैं, किसी भी मुश्किल समय का सामना बड़ी ही समझदारी और साहस के साथ करते हैं। इन लोगों के मित्र अच्छी संगती वाले होते हैं। मित्रों की ओर से सदैव प्रसन्न रहते हैं। 7, 12, 13, 16 और 30
वर्ष की आयु में संकट का सामना करना पड़ सकता है।
स्त्रियों को अनिवार्य रूप से प्रतिदिन 16 श्रृंगार करना चाहिए।
कमरबंद: कमर में धारण किया जाने वाला आभूषण है कमरबंद। पुराने समय कमरबंद को विवाह के बाद स्त्रियां अनिवार्य रूप से धारण करती थीं।
बिछुए: विवाह के बाद खासतौर पर पैरों की उंगलियों में पहने जाने वाला आभूषण है बिछुआ। यह रिंग या छल्ले की तरह होता है।
बाजूबंद: सोने या
चांदी के कड़े स्त्रियां बाहों में धारण करती हैं। इसे बाजूबंद कहा जाता है।
अंगूठी: उंगलि
यों में अंगूठी पहनने की परंपरा प्राचीन काल से ही चली आ रही है।
काजल: आंखों की सुंदरता बढ़ाने के लिए काजल लगाया जाता है। काजल लगाने से स्त्रियों पर किसी की बुरी नजर का कुप्रभाव भी नहीं पड़ता है। साथ ही, काजल से आंखों से संबंधित कई रोगों से बचाव भी हो जाता है
मंगल सूत्र और हार: स्त्रियां गले में हार पहनती हैं। विवाह के बाद मंगल सूत्र भी अनिवार्य रूप से पहनने की परंपरा है। मंगल सूत्र के काले मोतियों से स्त्री पर बुरी नजर का कुप्रभाव नहीं पड़ता है।
बिंदी: स्त्री या कन्या विवाहित हो या अविवाहित, दोनों के लिए ही बिंदी लगाना अनिवार्य परंपरा है। शास्त्रों के अनुसार बिंदी को घर-परिवार की सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है
चूड़ियां या कंगन: किसी भी स्त्री के लिए चूड़ियां पहनना अनिवार्य परंपरा है। विवाह के बाद चूड़ियां सुहाग की निशानी मानी जाती हैं। चूड़ियां कलाइयों में पहनी जाती हैं। ये कांच की, सोने-चांदी या अन्य किसी धातु की हो सकती हैं।
मेहंदी: किसी भी स्त्री के लिए मेहंदी अनिवार्य श्रृंगार माना जाता है। इसके बिना स्त्री का श्रृंगार अधूरा कहा जाता है। किसी भी मांगलिक कार्यक्रम के दौरान स्त्रियां अपने हाथों और पैरों में मेहंदी रचाती हैं। ऐसा माना जाता है कि विवाह के बाद नववधू के हाथों में मेहंदी जितनी अच्छी रचती है, उसका पति उतना ही ज्यादा प्यार करने वाला होता है।
गजरा: फूलों का गजरा भी अनिवार्य श्रृंगार माना जाता है। इसे बालों में लगाया जाता है
टीका: विवाहित स्त्रियां मस्तक पर मांग के बीच में जो आभूषण धारण करती हैं, उसे ही टीका कहा जाता है। यह आभूषण सोने या चांदी
का हो सकता है।
नथ: स्त्रियों के लिए नथ भी अनिवार्य श्रृंगार माना गया है। इसे नाक में धारण किया जाता है। नथ धारण करने पर कन्या की सुंदरता में चार चांद लग
जाते हैं।
शादी का विशेष परिधान: कन्या विवाह के समय जो खास परिधान पहनती है, वह भी अनिवार्य श्रृंगार में शामिल है। ये परिधान लाल रंग का होता है और इसमें ओढ़नी, चोली और घाघरा शामिल होता है।
सिंदूर: विवाहित स्त्रियों के लिए सिंदूर को सुहाग की निशानी माना जाता है। ऐसा माना जाता कि सिंदूर लगाने से पति की आयु में वृद्धि होती है
पायल: पायल किसी भी कन्या या स्त्री के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण आभूषण है। इसके घुंघरुओं की आवाज से घर में सकारात्मक वातावरण निर्मित होता है।
कानों के कुंडल: कानों में पहने जाने वाले कुंडल भी श्रृंगार का अनिवार्य अंग है। यह भी सोने या चांदी की धातु का हो सकता है।
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