शनि की बहन है भद्रा
भद्रा भगवान सूर्य की कन्या है। सूर्य की पत्नी छाया से उत्पन्न है और शनि की सगी बहन है। यह काले वर्ण, लंबे केश, बड़े-बड़े दांत तथा भयंकर रूप वाली है।
भद्रा योग के दौरान कार्य विशेष शुभ नहीं माने जाते। जिनमें यात्रा, कारोबार, कृषि, मांगलिक कार्य आदि प्रमुख है।भद्रा तीन लोकों में घूमने के दौरान जब पृथ्वी पर होती है तो इस स्थिति में अमंगल करती है
भद्रा के बारह नाम
धान्या, दधि मुखी, भद्रा, महामारी, खरानना, कालरात्रि, महारूद्रा, विष्टिकरण, कुलपुत्रिका, भैरवी, महाकाली, असुरक्षयकारी हैं।
भद्रा के प्रमुख दोष
* जब भद्रा मुख में रहती है तो कार्य का नाश होता है।
* जब भद्रा कंठ में रहती है तो धन का नाश होता है।
* जब भद्रा हृदय में रहती है तो प्राण का नाश होता है।
* जब भद्रा पुच्छ में होती है, तो विजय की प्राप्ति एवं कार्य सिद्ध होते हैं।
धान्या, दधि मुखी, भद्रा, महामारी, खरानना, कालरात्रि, महारूद्रा, विष्टिकरण, कुलपुत्रिका, भैरवी, महाकाली, असुरक्षयकारी हैं।
भद्रा के प्रमुख दोष
* जब भद्रा मुख में रहती है तो कार्य का नाश होता है।
* जब भद्रा कंठ में रहती है तो धन का नाश होता है।
* जब भद्रा हृदय में रहती है तो प्राण का नाश होता है।
* जब भद्रा पुच्छ में होती है, तो विजय की प्राप्ति एवं कार्य सिद्ध होते हैं।
No comments:
Post a Comment