Friday, 18 October 2013

त्यौहार की परंपरा से ही भारत आज और प्राचीन काल से   चला  आ रहा हे सनातन धर्म की संस्कृति और सुरक्षा की वजेह से देश का नाम हे ,आज का समय मॉडर्न और हाई टेक हो गया हे लोग अपने कामो और फालतू बातो में इतने बिजी हो गए की सब को भूल गए ,परिवार ,देश ,धर्म और रिश्तो को ,

त्योहारों की लड़ी एक ऐसे दवा हे जिसकी कारन इच्छा से या मजबूरी से सब घर वालो को इकठा होना पड़ता हे और इस बहाने से सबसे मिलना जुड़ना हो जाता हे बचपन की यादे ताजा हो जाती हे और कई परेशानी भी हल हो जाती हे
भारत में आज भी त्यौहार होली ,दिवाली राखी और अन्य त्यौहार सामूहिक ही बनाये जाते हे जिसमे रिश्तेदार दूर दूर से आना पड़ता हे चाहे एक दिन के लिए ही क्यों नहीं ,
त्यौहार के वजेह से सब लोगो को ऊर्जा यानि नया जीवन मिलता हे और जीने की उमंग रहती हे वरना जीने को तो पशु और पक्षी भी जीते हे

राम नरेश गुप्ता विवेक विहार सोडाला जयपुर 

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