Sunday, 20 October 2013

चुनाव क्या आ गए जैसे की कुछ लोगो की लाटरी निकल गयी ,हर पार्टी में टिकेट पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार हे प्रत्याशी ,जो कोई भी कह देता हे मान लेते हे और अपनी इज्ज़त तक खतरे में डाल  देते हे तन मन धन से ,कारन पार्टी के नाम पर चुनाव लड़ना मायने रखता हे बाकि को चुनाव लड़ने के लिए पसीना आ जाता हे और कभी कभी तो क़र्ज़ दार भी हो जाता हे क्योकि चुनाव में ही ये नेता नजर आते हे बाकि तो इनको फुर्सत ही नहीं मिलती सब कमाने में जो लगे रहते हे बस इन नेताओ के दो चार महीने बड़े बुरे निकलते हे वोट मांगने के चकर में सब गिरवी रख देते हे फिर किस्मत की जीते या हारे ,
इन नेताओ को तो हर साल की रिपोर्ट देनी चाहए जिससे ये इनको डर  रहे की अच्छा काम नहीं किया या कोई फर्जीवाड़ा किया तो जो  दुश्रे no  पर आया था उसे मौका मिले ,नहीं तो पांच साल बिना नेता के रहे तो कुछ हद तक इन पर लगाम लाग सकती हे नहीं तो पुरे देश को खा गए और आम इंसान कब बगावत कर दे कोई कुछ नहीं कह सकता

राम नरेश गुप्ता विवेक विहार सोडाला जयपुर 

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