Monday, 21 October 2013

इन दिनों सिर्फ देश में क्रिकेट का ही खेल चल रहा हे कभी हार तो कभी जित ,ज्यादातर बोर्ड क्रिकेट का अपने हित के लिए ही खेल रहा हे अब बाकि खेलो में भारत  कहा खडा हे जब एशियाड या ओलिंपिक खेल होते हे तो देश का नाम पदक तालिका में दूर दूर तक नजर नहीं आता तब देश के खेल एक्सपर्ट ,खेल मंत्री और अन्य खेलो के ज्ञाता अपने अपने दडबो यानि घोसले से बाहर आते हे और ऐसे बताते हे की इनकी बताये बातो पर चलते तो देश पदक तालिका में सबसे उपर होता ,कितने शर्म की बात हे सरकार में मंत्री और अन्य तो खेलो के बारे में जानते नहीं क्योकि राजनीती में चापलूसी से ही फुर्सत नहीं मिलती तो खेल कहा से खेलते ,बस किसी तरह से राजनीती में आ गए तो जम कर लुटने दो देश को ,
बस ज़ेरोथ ऑवर  में जो भी नजर में आ गया या जिसने इनकी सेवा की वो देश के लिए खेलने चला जाता हे और रिजल्ट सबके सामने होता हे और जिसकी कोई पहुच नहीं होती वो हकदार होने के बाबजूद नहीं खेल पाताऔर उसका खामियाजा देश को भुगतना पड़ता हे क्या करे देश में कोई कानून कायदे हे या नहीं या उनका पालन सिर्फ आम इंसान  करे.
अब भी समय हे और देश के लिए खेलने के लिए अभी से मेहनतकरे और जी तोड़ करके खेले और पदक तालिका में देश का नाम अंकित करे 
अभी हाल ही में गुलामो में देश का नाम कोनसे स्थान पर था सबने पढ़ा होगा 
खेलो की तयारी शुरू से करे ना की सरकारी खर्चे पर विदेश घूम आये और मात्र ओपचारिकता निभाने से आपका फायदा हो सकता हे लेकिन देश का भला नहीं हो सकता ,सिवाय नुक्सान के 

राम नरेश गुप्ता विवेक विहार सोडाला जयपुर 

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