Monday, 18 November 2013

देश के चार राज्यो में चुनाव हो रहे हे बड़ी पार्टी तो कांग्रेस ,भाजपा ,ही हे बाकि तो अपने राज्य तक ही सिमित हे किसी भी पार्टी में कोई भी पार्टी या देश या समाज के लिए काम नहीं करता बट सब के अपने अपने हित हे जहा उनका हित नहीं सधता ,बही पार्टी से बगावत कर देते हे  इतिहास         साक्षी हे साथ में पार्टी भी मजबूर हे ऐसे लोगो को टिकट देती हे जो कि अपराधी या जैल में हे या जिन पर मुकदमे  चल रहे हे क्योकि राजनीती में सब बगुले भक्त हे जब जिसका मौका लगता हे सलटा देता हे बस इंतज़ार सही समय का होता हे बच कोई नहीं पाता।
अब राज्य में चुनाव के समय जिसकी चवन्नी चलती हे वो अपने काम यानि ट्रांसफर या पोस्टिंग या अनय पद ले लेता हे बाकि आम जनता के जरुरी काम भी नहीं हो रहे हे सब चापलूसी चुनाव आयोग कि करनी पड़ती हे क्योकि चुनावो के समय ही चुनाव आयोग कि चलती हे बो भी सिर्फ दिखावे के लिए बाकि। ……
चुनाव के समय हर प्रत्याशी अपनी सम्पति घोषित करता हे अब क्या सही क्या गलत ,क्या कभी चुनाव आयोग ने इनके चेकिंग कि या मात्र खाना पूर्ती हे या जनता को गुमराह करते हे ये लोग ,क्योकि इनके पास अथाह सम्पति हे और ये धन कहा से कहा पहुँच जाता हे वो भी बिना म्हणत के तो क्या ये काला धन हे या सफ़ेद धन ,क्या कभी चुनाव आयोग ने इतनी हिमत दिखाई कि इनके द्वारा दिया गया कथन सही हे या गलत हे
इस देश का तो सभी लोग शोषण करने में लगे हे राजनेता हो या अफसर बस मौका लगना चाहिए

राम नरेश गुप्ता  विवेक विहार सोडाला जयपुर 

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