तुम उपकार सुग्रीवहिं किन्हा।
राम मिलाय राजपद दिन्हा।।
यदि कोई व्यक्ति भयंकर परेशानियों में फंसा हुआ हो तो उसके लिए हनुमान चालीसा का जप सर्वश्रेष्ठ उपाय है। जब सुग्रीव अपने भाई बाली के भय छिपे हुए थे, तब हनुमानजी ने ही उनकी मदद की और उन्हें परेशानियों से निकाला।
तुम्हरों मंत्र विभिषन माना।
लंकेश्वर भए सब जग जाना।।
सुग्रीव की तरह ही हनुमानजी ने रावण के भाई विभिषण की भी मदद की। हनुमानजी ने ही विभिषण की भेंट श्रीराम से कराई और श्रीराम ने उन्हें लंकाधिपति बनाया। विभिषण रावण का भाई था, फिर भी हनुमानजी की कृपा से उसे श्रीराम का आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
किसी भी व्यक्ति को जीवन में श्रीराम की कृपा के बिना कोई भी सुख-सुविधा प्राप्त नहीं हो सकती है। श्रीराम की कृपा प्राप्ति के लिए हमें हनुमानजी को प्रसन्न करना चाहिए।
सब सुख लहे तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डरना।।
जो लोग इस पंक्ति का जप करते हैं उन्हें उन्हें हनुमानजी की कृपा से सभी सुख प्राप्त हो जाते हैं। इसके साथ हनुमानजी के भक्तों को किसी भी परिस्थिति में डर का सामना नहीं करना पड़ता है
चारो जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।
हनुमान का प्रताप चारों ही युग सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग में फैला हुआ है
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