दल बदल और घुसपैठ आज कि राजनीती में नहीं बल्कि प्राचीन समय से ही चला आ रहा हे इन नेताओ को सता में रहने का सुख चाहिए जब इनकी पार्टी इनको तवजो नहीं देती तो विपक्ष तुरंत राजी हो जाता हे इनको लेने के लिए बस अंधे को क्या चाहिए इनका काम बन जाता हे और फिर ये भेदिये कि तरह सब उगल देते हे अमूमन सभी पार्टियो में दल बदल हो रहा हे
जकब कोई नेता अपने दल के मुखिया के विरुद्ध आवाज उठाता हे तो पार्टी वाले उसे निकल देते हे और अनय पार्टी में मिल जाता हे ये चुनावी समय में ज्यादा होता हे और इसमें बिचोलिये भी कमा जाते हे
अब सरकार या चुनाव आयोग लाचार हे कारण कोई नियम भी नहीं हे जो कि दल बदल को रोके
er राम नरेश गुप्ता २८६ विवेक विहार सोडाला जयपुर
जकब कोई नेता अपने दल के मुखिया के विरुद्ध आवाज उठाता हे तो पार्टी वाले उसे निकल देते हे और अनय पार्टी में मिल जाता हे ये चुनावी समय में ज्यादा होता हे और इसमें बिचोलिये भी कमा जाते हे
अब सरकार या चुनाव आयोग लाचार हे कारण कोई नियम भी नहीं हे जो कि दल बदल को रोके
er राम नरेश गुप्ता २८६ विवेक विहार सोडाला जयपुर
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