Tuesday, 22 April 2014

पता नहीं चुनावो में नेताओ को क्या हो जाता हे सब पागलो की तरह एक दुशरे पर कीचड़ उछालते फिरते हे सभी पार्टी वाले नेता ,इन चुनावो में ये नेता बोलने में अपनी सीमा तक लाँघ जाते हे की किस को क्या कह दिया और वैसे एक दुशरे से गले मिलते हे और तो और शाम को जाम से जाम टकराते हे लगता हे की नेता लोग आम जनता को बेफकूफ  समझते हे या अपने आप को डेड होशियार ,ऐसे नहीं करना चाहिए लेकिन आदत से मझबूर जो हे ,जनता भी सयानी हो गयी ,कब किस नेता का राजनितिक अन्त करदे पता नहीं चलता ,तो कलयुग के नेताओ थोड़ा संभल जाओ ,नहीं तो जनता बैंड बजा देंगी

राम नरेश गुप्ता विवेक विहार सोडाला जयपुर 

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