मनमोहन सिंह जी एक दो दिन मे केद से बाहर होने वाले हे ,पिछले दस सालो से कितने हि तड़पड़ा रहे हे कि बोलणे का अधिकार दिया जाये लेकिन मैडम का इशारा चुप चाप सीट पर बैठे रहो ,लगा कि पपेट ओर मन मोहन जी मे कोइ अन्तर नहीं। मालिक चला रहा हे
एक बात आपको बता दु कि मन जि बहुत बडे अर्थ शास्त्री थे ओर अपने विषय के सुपर थे लेकिन इन कि कम बोल्ने कि आदत ओर हूकम को मान्ने वाली विशेसता ने इनको भारत के पी। ऍम पद पर आसीन हो गए ,इतना जरुर हे कि इन्होने पद के मजे नहि लिए बल्कि दिन टेंशन मे हि बिताये ,जो आया ,इन पर गुर्रा कर चला गया ,
सबसे बड़ी बात इन्होने अपनी पार्टी यानि सता का बैंड बजा दिया दुश्मनो कि जरुरत हि नहि पडी
पार्टी प्रमुख को इनसे बडा कोई यस मेन नहि मिला ,पी। ऍम पद के उम्मीदवार तो बहुत थे लेकिन इन जैसे पपेट कोइ नहि थ तो इनाम मिलणा ज़ायज थ
मन जि की किस्मत भि बडी अज़ीब हे लोग इनकों यूज़ करकें फैक देते हे इन्के हि बारू जि ने हीं इनकि किताब मे पोल खोल दि ,जो आया इनको धमका कर चला गया ओर सरदार जि चुपचाप समय का इन्तज़ार करते रहे ,
अब इनका समय आ गया ओर अपने मन कि भड़ास निकाल ने कि पूरी तेयारी मे हे बस दो चार दिन कि देर हे
इनका सबसे बड़ा गलत निर्णय कोनसा रहा पी। ऍम पद स्वीकार करना या यस मन बन कर या कोइ आनय कारन
अब पद छोड़ने के बाद इन पर किसी का दबाव नहि होगा ओर फ्री स्टाइल मे बोलेंगें कारन कितनी सालो से जवान बन्द थि तो गुबार तो निकलेंगे अब किस पर ये तो समय का इंतज़ार करो ओर मन जि के। ...................
राम नरेश गुप्ता विवेक विहार सोडाला जयपुर
एक बात आपको बता दु कि मन जि बहुत बडे अर्थ शास्त्री थे ओर अपने विषय के सुपर थे लेकिन इन कि कम बोल्ने कि आदत ओर हूकम को मान्ने वाली विशेसता ने इनको भारत के पी। ऍम पद पर आसीन हो गए ,इतना जरुर हे कि इन्होने पद के मजे नहि लिए बल्कि दिन टेंशन मे हि बिताये ,जो आया ,इन पर गुर्रा कर चला गया ,
सबसे बड़ी बात इन्होने अपनी पार्टी यानि सता का बैंड बजा दिया दुश्मनो कि जरुरत हि नहि पडी
पार्टी प्रमुख को इनसे बडा कोई यस मेन नहि मिला ,पी। ऍम पद के उम्मीदवार तो बहुत थे लेकिन इन जैसे पपेट कोइ नहि थ तो इनाम मिलणा ज़ायज थ
मन जि की किस्मत भि बडी अज़ीब हे लोग इनकों यूज़ करकें फैक देते हे इन्के हि बारू जि ने हीं इनकि किताब मे पोल खोल दि ,जो आया इनको धमका कर चला गया ओर सरदार जि चुपचाप समय का इन्तज़ार करते रहे ,
अब इनका समय आ गया ओर अपने मन कि भड़ास निकाल ने कि पूरी तेयारी मे हे बस दो चार दिन कि देर हे
इनका सबसे बड़ा गलत निर्णय कोनसा रहा पी। ऍम पद स्वीकार करना या यस मन बन कर या कोइ आनय कारन
अब पद छोड़ने के बाद इन पर किसी का दबाव नहि होगा ओर फ्री स्टाइल मे बोलेंगें कारन कितनी सालो से जवान बन्द थि तो गुबार तो निकलेंगे अब किस पर ये तो समय का इंतज़ार करो ओर मन जि के। ...................
राम नरेश गुप्ता विवेक विहार सोडाला जयपुर
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