जयपुर सिटी में सरे आम ,दिन दहाड़े महिलाओ के गले से चैन छीनी जा रही हे बैंक से आप पैसे निकालते हे उसी पल बाहर निकलते ही बदमाश पैसे छीन कर फरार ,ये रेकी नहीं तो क्या पुलिस वाले फॉर्मेलिटी करते हे लूटने के बाद ,एक तो इंसान परेशान ऊपर से पुलिस वालो के पचास सवाल ,क्या करते हो ,क्या कर रहे थे ,कैसे लग रहे थे लुटेरे। इन को सब मालूम हे लेकिन क्योकि बिना शह के परिंदा भी पर नहीं मार सकता तो इंसान कहा से
पुलिस मुखिया कह रहे हे की पुलिस वाले ड्यूटी पूरी जिम्मेदारी से नहीं करते बल्कि एक दो जगह जा कर औपचारिकता निभा लेते हे और पुलिस वालो का काम मुखविर करते हे
जब रक्षक ही भक्षक बन जाये तो कौन क्या कर सकता हे ,
होना तो ये चाहिए की जिस एरिया में घटना हो उस एरिया के पुलिस वाले और थाना को दोषी मानं कर तुरंत सजा दे और फिर भी नहीं माने तो उनको नौकरी से बर्खास्त कर दे ना की उलटी सीधी बयान बाजी ना करे ,पुलिस के आला अधिकारी नेताओ और मंत्रीओ की हाजरी ना लगाये बल्कि देखे की कौन ड्यूटी मुस्तेजी से नहीं कर रहा ,
अभी तक तो ये होता हे की सब अपने अपने उल्लू सीधे करते हे और जनता भोगती हे और ये लोग मजे लेते हे लुटेरे चेन यानि आराम से घोड़े बेच कर सोते हे डर काहे का ,जब सैंया कोतवाल। ………………
राम नरेश गुप्ता विवेक विहार सोडाला जयपुर
पुलिस मुखिया कह रहे हे की पुलिस वाले ड्यूटी पूरी जिम्मेदारी से नहीं करते बल्कि एक दो जगह जा कर औपचारिकता निभा लेते हे और पुलिस वालो का काम मुखविर करते हे
जब रक्षक ही भक्षक बन जाये तो कौन क्या कर सकता हे ,
होना तो ये चाहिए की जिस एरिया में घटना हो उस एरिया के पुलिस वाले और थाना को दोषी मानं कर तुरंत सजा दे और फिर भी नहीं माने तो उनको नौकरी से बर्खास्त कर दे ना की उलटी सीधी बयान बाजी ना करे ,पुलिस के आला अधिकारी नेताओ और मंत्रीओ की हाजरी ना लगाये बल्कि देखे की कौन ड्यूटी मुस्तेजी से नहीं कर रहा ,
अभी तक तो ये होता हे की सब अपने अपने उल्लू सीधे करते हे और जनता भोगती हे और ये लोग मजे लेते हे लुटेरे चेन यानि आराम से घोड़े बेच कर सोते हे डर काहे का ,जब सैंया कोतवाल। ………………
राम नरेश गुप्ता विवेक विहार सोडाला जयपुर
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