Wednesday, 7 May 2014

नेता और अफसर दो ही प्राणी हे इस देश मे जो कि बाते तो बहुत बढ़ चढ़ कर करते हे काम देहले का भि नहि करती बस लोगो को बेफकूफ बनाने  का काम हे
नेता तो चुनावो के समय ज्यादा दीखते हे बाकि रहते तो हमेंशा हे ,बारिष के मेंढक कि तरह ,चुनवों मेज्यादा ,वोट मॉँगने के लिये नेता से कुछ भी  करवा लो ,घर घर वोट के लिये घूमते हे जिन गळी मोहल्लो मे जानवर ,जाना पसन्द नहि करती बहा आप नेता को देख लो ,वोट मांगने के लिये अलग अलग स्वांग रचते हे जो भी हो नेता कि खाल बहुत मज़बूत होति हे बस एक बार जिट जाये फ़िर तो मरते दम तो लोहा मनबाते हे
ऐसे ही दुशरा प्राणी अफसर हे यदि आपने हज़ूर कि चमचा गिरि कर लि या हुकुम मे रहे तो कितने हि मर्डर कर लो कोइक़ुछ  नहि बिगाड़  सकता आप का ,बही अपने अफसार का कहना नहि माना तो फ़िर बज गये बारह आपके तो ,क्योकि अफसार किसी कि नहीं सुनते
आज कल के अफसर तो कोर्ट को कुछ नहि समझते तो फ़िर आप अपने हक़ के लिये कही भि जाऒ ,कोइ नहि बचा सक्ता आप्को
लिहाजा इन दोनो से ही दूर रह्ना चाहीऐ ,फ़िर भि आप्की किस्मत। ...................

राम नरेश गुप्ता विवेक विहार सोडाला जयपुर 

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