Thursday, 5 June 2014

संसद में कुछ यानि तीन ,चार सांसदों ने संस्कृत में शपथ ले ली ,तो क्या हुआ ,क्या ये सांसद रूटीन लाइफ में भी संस्कृत का उपयोग करते हे या मात्र दिखावा ,इन के संस्कृत में शपथ लेने से इस भाषा का उद्धार नहीं हो सकता जब तक ये भाषा आम लोग में ना आ जाये ,स्कूल में भी इसे पढ़ाते हे लेकिन औपचारिकता के कारन ,क्योकि पढ़ने वाला और पढ़ाने वाला सबकी मजबूरी हे
सरकार तो सभी भाषा को अनुदान देती हे और बढ़ावा देना चाहती हे लेकिन बीच के दलाल जो भी हो अपने फायदे के लिए रुकवा देते हे और अनुदान हड़प जाते हे जब तक इन लोगो की करनी और कथनी सामान नहीं होगी कुछ नहीं होगा

राम नरेश गुप्ता विवेक विहार सोडाला जयपुर 

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