पेयजल संकट गर्मियों में ही सबको याद आता हे बैसे साल भर जल को बर्बाद करते हे बारिश के जल को इकट्ठा कर ले या किसी तरह से जमींन में जाने दे तो वाटर लेवल बढ़ सकता हे लेकिन आज के मनुष्य ने चारो तरफ कंक्रीट के जंगल और जल का बुरी तरह से दोहन करते हे आने वाली पीढ़ी की तो परवाह ही नहीं हे
ये तो सिटी या शहरों में ही जल नजर आ सकता हे गावों और रेगिस्तान में तो पीने का जल कितने ही किलोमीटर पैदल चल कर लाते हे बही सिटी में पार्को और कूलर ,में ही बर्बाद करते हे
सरकार के पास नीति तो बहुत हे जल बचाने की लेकिन कुछ लालच की वजह से फॉलो नहीं होती ,
सरकार के साथ आम जन को भी जागरूक होना होगा और जल के दुरपयोग को रोकना होगा नहीं तो फ्यूचर में जल खत्म तो सृष्टि खत्म
राम नरेश गुप्ता विवेक विहार सोडाला जयपुर
ये तो सिटी या शहरों में ही जल नजर आ सकता हे गावों और रेगिस्तान में तो पीने का जल कितने ही किलोमीटर पैदल चल कर लाते हे बही सिटी में पार्को और कूलर ,में ही बर्बाद करते हे
सरकार के पास नीति तो बहुत हे जल बचाने की लेकिन कुछ लालच की वजह से फॉलो नहीं होती ,
सरकार के साथ आम जन को भी जागरूक होना होगा और जल के दुरपयोग को रोकना होगा नहीं तो फ्यूचर में जल खत्म तो सृष्टि खत्म
राम नरेश गुप्ता विवेक विहार सोडाला जयपुर
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