Friday, 24 April 2015

पेयजल संकट गर्मियों में ही सबको  याद आता हे बैसे साल भर जल को बर्बाद करते हे बारिश   के जल को इकट्ठा कर ले या किसी तरह से जमींन  में जाने दे तो वाटर लेवल बढ़ सकता हे लेकिन आज के मनुष्य ने चारो तरफ कंक्रीट के जंगल और जल का बुरी तरह से दोहन करते हे आने वाली पीढ़ी की तो परवाह ही नहीं हे
ये तो सिटी या शहरों में ही जल नजर आ सकता हे गावों और रेगिस्तान में तो पीने  का जल कितने ही किलोमीटर पैदल चल कर लाते हे बही सिटी में पार्को और कूलर ,में ही बर्बाद करते हे
सरकार के पास नीति तो बहुत हे जल बचाने   की लेकिन कुछ लालच की वजह से फॉलो  नहीं होती ,
सरकार के साथ आम जन को भी जागरूक  होना होगा और जल के दुरपयोग को रोकना होगा नहीं तो फ्यूचर में जल खत्म तो सृष्टि खत्म
राम नरेश गुप्ता विवेक विहार सोडाला जयपुर 

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