विधुत कंपनी और सरकार को आम जनता से कोई लेना देना नहीं हे ,किसी भी तरह से इनके पास पैसे आने चाहिए ,यहाँ के अफसर और इंजीनियर स्वंय तो काम करते नहीं बल्कि पूरा काम ठेके और सविंदा कर्मचारियों से करवाते हे क्योकि ये लोग काम के मास्टर नहीं होते और जो भी काम करते हे उस पर अफसर और इंजीनियर जांच नहीं करते तो काम में लापरवाही तो होगी ही
यदि कोई कम्प्लेन करने जाए तो भगा देते हे या सुनते ही नहीं ,क्योकि दलाली ऊपर से लेकर निचे तक बंधी हुयी हे
होना तो ये चाहये की जिस भी एरिया में करंट से कोई भी एक्सीडेंट होता हे तो उसके जिम्मेदार इंजीनियर को सीधे रूप से दोषी माना जाये और उसे कड़ी से कड़ी सजा दी जाए और तुरंत नौकरी से टर्मिनेट किया जाए ना की लीपा पोती करके मामले को रफा दफा किया जाए ,जो भी इंसान इन हादसों के शिकार होते हे उसकी व्यथा स्वंय और उसका परिवार वाले भुगतते हे सजा कठोर और तुरंत हो तो हादसे अपने आप रूक सकते हे
राम नरेश गुप्ता विवेक विहार सोडाला जयपुर
यदि कोई कम्प्लेन करने जाए तो भगा देते हे या सुनते ही नहीं ,क्योकि दलाली ऊपर से लेकर निचे तक बंधी हुयी हे
होना तो ये चाहये की जिस भी एरिया में करंट से कोई भी एक्सीडेंट होता हे तो उसके जिम्मेदार इंजीनियर को सीधे रूप से दोषी माना जाये और उसे कड़ी से कड़ी सजा दी जाए और तुरंत नौकरी से टर्मिनेट किया जाए ना की लीपा पोती करके मामले को रफा दफा किया जाए ,जो भी इंसान इन हादसों के शिकार होते हे उसकी व्यथा स्वंय और उसका परिवार वाले भुगतते हे सजा कठोर और तुरंत हो तो हादसे अपने आप रूक सकते हे
राम नरेश गुप्ता विवेक विहार सोडाला जयपुर
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