Friday, 10 July 2015

विधार्थीओ की सुरक्षा की परवाह किसी को नहीं हे सब उसे उपभोग की वस्तु मानते हे घर वाले स्कूल भेज कर अपने सपनो को पूरा करना चाहते हे घर से स्कूल वाहनो में जानवरो की तरह जाते हे स्कूल जाते ही मजदूर बन जाते हे टीचर बच्चो पर तरह तरह के जुल्म करते हे
खेलने कूदने की उमर में सब पाबन्दी ,यानि  बच्चा कोई बहुत बड़ी निवेश हो गया हे युवा आने से पहले ही बूढ़ा हो जाता हे और अरमान दब जाते हे
कोई भी इनके बारे में नहीं सोचता ,संस्कार नाम की बाते तो किताबो में दफ़न हो गयी
सब राम भरोसे चल रहा हे यदि पढ़ लिख कर क्या  करेंगा नौकरी तो हे ही नहीं तो सब चल रहा हे क्यों चल रहा हे किसी को नहीं मालूम

राम नरेश गुप्ता विवेक विहार सोडाला जयपुर 

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