विधार्थीओ की सुरक्षा की परवाह किसी को नहीं हे सब उसे उपभोग की वस्तु मानते हे घर वाले स्कूल भेज कर अपने सपनो को पूरा करना चाहते हे घर से स्कूल वाहनो में जानवरो की तरह जाते हे स्कूल जाते ही मजदूर बन जाते हे टीचर बच्चो पर तरह तरह के जुल्म करते हे
खेलने कूदने की उमर में सब पाबन्दी ,यानि बच्चा कोई बहुत बड़ी निवेश हो गया हे युवा आने से पहले ही बूढ़ा हो जाता हे और अरमान दब जाते हे
कोई भी इनके बारे में नहीं सोचता ,संस्कार नाम की बाते तो किताबो में दफ़न हो गयी
सब राम भरोसे चल रहा हे यदि पढ़ लिख कर क्या करेंगा नौकरी तो हे ही नहीं तो सब चल रहा हे क्यों चल रहा हे किसी को नहीं मालूम
राम नरेश गुप्ता विवेक विहार सोडाला जयपुर
खेलने कूदने की उमर में सब पाबन्दी ,यानि बच्चा कोई बहुत बड़ी निवेश हो गया हे युवा आने से पहले ही बूढ़ा हो जाता हे और अरमान दब जाते हे
कोई भी इनके बारे में नहीं सोचता ,संस्कार नाम की बाते तो किताबो में दफ़न हो गयी
सब राम भरोसे चल रहा हे यदि पढ़ लिख कर क्या करेंगा नौकरी तो हे ही नहीं तो सब चल रहा हे क्यों चल रहा हे किसी को नहीं मालूम
राम नरेश गुप्ता विवेक विहार सोडाला जयपुर
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