अस्पतालों में निशुल्क दवा मात्र सरकारी योजना हो कर रह गयी हे सरकार तो चाहती हे की ये सफल रहे लेकिन ,दलाल ,डॉक्टर और दावा वाले नहीं चाहते ,कारण उनकी दूकान बंद सी हो गयी ,डॉक्टर तो अभी भी मरीजो को घर पर फीस लेकर बाज़ार की दवा लिखता हे और ये बिल पास होते हे निशुल्क दवा नकली और तय मानक के हिसाब से नहीं आती ,क्योकि सरकारी दवा तो आम और गरीब तबका ही लेता हे निशुल्क दवा के चकार में मरीज और उसके परिजन का पूरा दिन ख़राब हो जाता हे और डॉक्टर पूरी दवा भी नहीं लिखता और मरीज ज्यादा बीमार हो जाता हे क्योकि सरकारी तंत्र में कोई किसी की नहीं सुनता बस सब कमिसन के चक्कर में आम जनता को लुटते हे शर्म आणि चाहिए
राम नरेश गुप्ता 286 विवेक विहार सोडाला जयपुर
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