क्रिकेट, सट्टेबाजी, BCCI, बॉलीवुड और हजारों करोड़ का काला कारोबार
ये आज से ही नहीं पता नहीं कितने सालो से चल रहा हे हर इंसान जो की इतने बड़े पद पर पंहुचा हे तो बो भी कही ना कही से जुगाड़ लगाया होगा ,तन मन धन से ,नहीं तो वो अर्दली भी नहीं बन सकता ,रही बात सरकार की तो सरकार चलाने के लिए पैसे को बाटा जाता हे जिस तरह से भोकते हुए कुत्ते को रोटी का टुकडा डाल कर अपना काम करते हे और सरकार में जो भी मंत्री ,अफसर या अन्य हे बो भी इस बात को जानते हे और ये सब लोग बेईमान और देश और जनता को लुटने वाले होते हे इनको सिर्फ अपने पद और सता में रहने का जो चस्का लग गया उसके लिए अपने परिवार और रिश्तेदारों को भूल जाते हे बस किसी तरह से बने रहे चाहे उसके लिए दंगे फसाद या जासूसी या अन्य कोई भी काम करना पड़े ,क्योकि पुरे तालाब में भांग घुली हुई हे सब अपने आप को निर्दोष बताते हे और अन्य को दोषी ,तो सिस्टम कहा से और कैसे सुधरे ,बस इस तबाद तोड़ में जिसके जो भी हाथ लगता हे उसको चुरा लेता हे और इमानदार बन कर अपने आप को धर्मात्मा मानता हे ये उसकी भूल हे लेकिन जब दिन लद जाते हे तो अंत निश्चित हे ,
इस सिस्टम को सुधरने के लिए सब लोगो को अपनी अपनी स्वार्थ की आहुति देनी होगी वरना जिसका समय आता हेव बो ही चूसने लगता हे देश को और देश के नागरिको को
ये आज से ही नहीं पता नहीं कितने सालो से चल रहा हे हर इंसान जो की इतने बड़े पद पर पंहुचा हे तो बो भी कही ना कही से जुगाड़ लगाया होगा ,तन मन धन से ,नहीं तो वो अर्दली भी नहीं बन सकता ,रही बात सरकार की तो सरकार चलाने के लिए पैसे को बाटा जाता हे जिस तरह से भोकते हुए कुत्ते को रोटी का टुकडा डाल कर अपना काम करते हे और सरकार में जो भी मंत्री ,अफसर या अन्य हे बो भी इस बात को जानते हे और ये सब लोग बेईमान और देश और जनता को लुटने वाले होते हे इनको सिर्फ अपने पद और सता में रहने का जो चस्का लग गया उसके लिए अपने परिवार और रिश्तेदारों को भूल जाते हे बस किसी तरह से बने रहे चाहे उसके लिए दंगे फसाद या जासूसी या अन्य कोई भी काम करना पड़े ,क्योकि पुरे तालाब में भांग घुली हुई हे सब अपने आप को निर्दोष बताते हे और अन्य को दोषी ,तो सिस्टम कहा से और कैसे सुधरे ,बस इस तबाद तोड़ में जिसके जो भी हाथ लगता हे उसको चुरा लेता हे और इमानदार बन कर अपने आप को धर्मात्मा मानता हे ये उसकी भूल हे लेकिन जब दिन लद जाते हे तो अंत निश्चित हे ,
इस सिस्टम को सुधरने के लिए सब लोगो को अपनी अपनी स्वार्थ की आहुति देनी होगी वरना जिसका समय आता हेव बो ही चूसने लगता हे देश को और देश के नागरिको को
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