मिड डे मील में आज कल स्कूली बच्चे काल कवलित हो रहे हे कारन फ्री का खाना खाने के लिए ,सरकार अपने वोट बैंक के कारन क्यों मासूमो की जान लेने पर तुली हुयी हे थोड़ी बहुत तो शर्म करो ,
मिड डे मील को बनाने के लिए कोई रसोइया तो देते नहीं और देते भी हे तो उसकी पगार पूरी नहीं मिलती अब चुकी सरकारी स्कूलों में गरीब और आम इंसान के बच्चे पढने आते हे तो कोई भी जो भी हेड मास्टर की चमचा गिरी करता हो उसे ही जिमेदारी मिल जाती हे तो पुरे का पूरा सामान तो अपने घर और अफसरों के घर भेज देता हे और ओपचारिक रूप से सडा ,गला और बासी कीड़े मकोड़े पड़े हुए यानि की बिना चेक किये हुए को ही गरीब बच्चोमिड डे मील को परोस देते हे क्योकि ये लोग बनाने वाले और स्कूल स्टाफ का अलग से बनता हे खाना इन मिड डे मील में जबकि इन को तो मिलना ही नहीं चाहिए लेकिन क्या करे
अब जब गरीब का बच्चा मिड डे मील के खाने के बाद दुनिया में नहीं रहेंगा तो ये लोग स्कूल ही नहीं जायंगे अब होना ये चाहिए की जो स्टाफ की बजह से मर गए बच्चे उनको तुरंत फासी दे दी जाये ताकि फ्यूचर में कोई भी मिड डे मील बनाने वाला गलती नहीं करे और साथ में जो अफसर हे उसे भी जेल भेजा जाये क्यों नहीं उसने अपनी जिम्मेदारी निभाई .
नहीं तो रोते रहो कुछ नहीं होना जाना और जाँच के नाम पर सरकारी फण्ड को लुटे रहो लेकिन बुरे कर्मो का फल तो मिलेंगा चाहे देर से ही सही
राम नरेश गुप्ता विवेक विहार सोडाला जयपुर
मिड डे मील को बनाने के लिए कोई रसोइया तो देते नहीं और देते भी हे तो उसकी पगार पूरी नहीं मिलती अब चुकी सरकारी स्कूलों में गरीब और आम इंसान के बच्चे पढने आते हे तो कोई भी जो भी हेड मास्टर की चमचा गिरी करता हो उसे ही जिमेदारी मिल जाती हे तो पुरे का पूरा सामान तो अपने घर और अफसरों के घर भेज देता हे और ओपचारिक रूप से सडा ,गला और बासी कीड़े मकोड़े पड़े हुए यानि की बिना चेक किये हुए को ही गरीब बच्चोमिड डे मील को परोस देते हे क्योकि ये लोग बनाने वाले और स्कूल स्टाफ का अलग से बनता हे खाना इन मिड डे मील में जबकि इन को तो मिलना ही नहीं चाहिए लेकिन क्या करे
अब जब गरीब का बच्चा मिड डे मील के खाने के बाद दुनिया में नहीं रहेंगा तो ये लोग स्कूल ही नहीं जायंगे अब होना ये चाहिए की जो स्टाफ की बजह से मर गए बच्चे उनको तुरंत फासी दे दी जाये ताकि फ्यूचर में कोई भी मिड डे मील बनाने वाला गलती नहीं करे और साथ में जो अफसर हे उसे भी जेल भेजा जाये क्यों नहीं उसने अपनी जिम्मेदारी निभाई .
नहीं तो रोते रहो कुछ नहीं होना जाना और जाँच के नाम पर सरकारी फण्ड को लुटे रहो लेकिन बुरे कर्मो का फल तो मिलेंगा चाहे देर से ही सही
राम नरेश गुप्ता विवेक विहार सोडाला जयपुर
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