कोर्ट आदेश देदेता हे सरकार को की ये कार्य करो लेकिन सरकार में बैठे अफसर और कर्मचारी बिना लिए दिए काम ही नहीं करना चाहते ,कोई भी नागरिक बिना बात कोर्ट में नहीं जाता कोई ना कोई मजबूरी होती हे कोर्ट में जाना भी हर किसी के बस की बात नहीं कारन दाम लगते हे बिना दाम कोई नहीं सुनता ,अब जब कोर्ट का आदेश आ जाता हे की फला पीड़ित को उसका हक़ दिया जाये तो सरकारी अफसर और बाबु नहीं सुनते ,कहते हे की कोर्ट में खर्च किये हे तो कुछ खर्च यहाँ भी करो नहीं तो लगाते रहो चक्कर कोर्ट या सरकार में मंत्री हमारा क्या बिगड़ सकता हे क्योकि हम तो परमानेंट हे और मंत्री या कोर्ट में आदेश देने वाला तो कही भी जा सकते हे यानि पद से हट सकते हे तो ऐसे मामलो में जबकि प्राथी पीड़ित हे और अपना हक़ जितने के बाद भी बाबु और अफसर नहीं दे रहे हे तो क्या फिर अवमानना याचिका दायर करे फिर गयी सालो की तब तक उसकी नोकरी तो पूरी हो जायंगी और जीते जी उसे न्याय नहीं मिला मरने के बाद क्या मिलेंगा लेकिन उन अफसर और बाबु को कोई सजा नहीं तो ऐसे कानून की क्या इज़त जो अपने हक़ को भी नहीं दिला सके क्योकि हर मामलो में कोर्ट में नहीं जा सकते क्योकि अफसर फिर क्यों हे सरकार में जो की लाखो का चुना लगाते हे सरकारी फण्ड को
राम नरेश गुप्ता विवेक विहार सोडाला जयपुर
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