Friday, 2 August 2013

सड़क दुर्घटना को रोकना बहुत मुश्किल का काम हे ,कोई किसी की नहीं सुनता ,सड़क पर ऐसे वाहन चलाते हे की कोई पार्क ,या घर या किसी मेले में आये हो ,ना तो नियम का पालन करते हे ना ही लोगो में ट्रैफिक सेन्स हे खासतोर से पढ़े लिखे लोगो में ,सब अपनी अपनी दादा गिरी करते हे ,सडको पर महिला ,बुजुर्ग ,और यंग चेफ़ तो बहुत बुरी तरह से ड्राइव करते हे इनके कारन से जो  नियम से गाड़ी चलाते बो बेचारे सड़क पर गिर जाते हे

रही ट्रैफिक स्टाफ की बात तो ये लोग तो वसूली यानि खर्चे पानी के चकर में लगे रहते हे और ये सीधे साढ़े आम जन को ही पकड़ते हे और नियम का हवाला देकर चालान काट देते हे
बही जो लोग गलत तरीके से ,या हेलमट नहीं पहना या ज्यादा सवारी बैठा कर चलते हे उनको ये ट्रैफिक वाले कुछ नहीं कहते बल्कि गप  शप में मशगुल रहते हे
आज कल पेरेंट्स भी बच्चो  को गाड़ी ,स्कूटी और अन्य साधन दिलवा देते हे की समय बचेगा और पढाई करेंगा ,ये लोग स्कूल से गोत  लगाकर बिना  हेलमट गाड़ी घुमाते हे और इनकी तस्वीर पर माला पहननी पड़ती हे क्या करे सब को जल्दी रहती हे जबकि किसी को कोई काम नहीं हे
जल्दी घर से निकलो ,सेफ ड्राइव करो ,नियम का पालन करो और शांति से अपने स्थान पहुचो ,
कुछ नै तो कान में यार फ़ोन सुनना होता हे या मोबाइल पर बाते करते हे और ट्रैफिक वाला धेकता रहता हे कारन जो भो हो लेकिन जब तक कथनी और करनी सामान नहीं होगी कोई कुछ नहीं कर सकता
सरकार के साथ साथ आम जन और समाज सेवी को भी जुटना होगा तब कही जा कर कुछ सड़क दुर्घटना  रुक सकती हे

राम नरेश गुप्ता  विवेक विहार सोडाला जयपुर 

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