Friday, 2 August 2013

कडवे प्रवचन देने वाले तरुण सागर जी ने कहा की आम जन को अपने अपने हिसाब से करम करना चाहिए ना की तांत्रिक और ज्योतिष के चककर में पढ़ना चाहिए  ,लेकिन आदमी जब दुखी या परेशान होता हे तब इन लोगो की शरण में जाता हे ,मरता क्या नहीं करता ,मनुष्य को शांति कहा हे कही नहीं हे फिर भी अपने प्रयासों में कमी नहीं रखना चाहता हे
यदि  तांत्रिक और ज्योतिष इतने  ही पावरफुल या सर्व ज्ञाता हे तो इनको लोगो के काम तुरंत करने चाहिए ना की उनको चकर लगवाना ,की इतने वार आओ ,ये करो वो करो ,ये प्रसाद लाओ इसकी बलि दो या घर बदलो या और अन्य कई तरीके बताते हे
अब होता क्या हे की हजारो लोग इन की शरण में आते हे तो कुछ लोगो के काम हो जाते हे और वो लोग इनको इतना धन या सुविधा देदेते हे की इनके वारे न्यारे हो जाते हे और ये समाज में पूज जाते हे
मेने भी जीवन में बहुत जगह गया  सिर्फ जेब कटवाने के अलावा कुछ हासिल नहीं हुआ ,साधू ,सन्यासी और तांत्रिक के पास की मेरा ये काम होगा या नहीं ,हा तुम ये ले आओ या ये भेट कर दो हो जायेंगा। लेकिंकुच नहीं हुआ
क्योकि जब तक आदमी खुद ठोकर नहीं खता किसी की नहीं मानता ,अब में कही नहीं जता जो होना हे वो होगा बस आप अछे काम करो बाकि सब उपर या जिस के भरोसे हो छोड़ दो और शांति से जीवन निकालो

राम नरेश  गुप्ता विवेक  विहार सोडाला जयपुर 

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