Monday, 11 November 2013

 मूर्ख शिष्य को उपदेश देने पर, चरित्रहीन स्त्री का पालन-पोषण करने पर, किसी दुखी व्यक्ति के साथ रहने पर दुख ही प्राप्त होता है।
यदि कोई स्त्री दुष्ट स्वभाव वाली है, हमेशा कठोर वचन बोलने वाली है, चरित्रहीन है तो उसे छोड़ देना चाहिए या उससे दूर हो जाना चाहिए। इसी प्रकार किसी नीच व्यक्ति से भी किसी प्रकार का व्यवहार नहीं रखना चाहिए। जो नौकर अपने मालिक का आदेश नहीं मानता हो उसे कार्य से मुक्त कर देना चाहिए और जिस घर के आसपास सांप रहते हों वहां नहीं रहना चाहिए। जो भी व्यक्ति इन बातों का पालन नहीं करता है उसे मृत्यु के समान कष्ट भोगने पड़ते हैं।
किसी भी श्रेष्ठ पुरुष को आपत्तिकाल के लिए धन बचाकर रखना चाहिए। धन से भी अधिक अपनी पत्नी की रक्षा करनी चाहिए और पत्नी से भी ज्यादा स्वयं की रक्षा करनी चाहिए, क्योंकि पति सुरक्षित रहेगा तभी उसका परिवार भी सुरक्षित रहेगा।
किसी पुरुष का पुत्र आज्ञाकारी हो और पत्नी वश में हो तथा धन की कोई कमी न हो तो उसका जीवन किसी स्वर्ग के समान ही है।
 स्त्री और पुरुष दोनों के लिए ही बहुत खास बात बताई है।  सबसे पहला कष्ट है मूर्खता, इसके बाद दूसरा कष्ट है जवानी और सबसे बड़ा है किसी पराए घर में रहना।

समस्याएं सभी के जीवन में होती हैं और इन समस्याओं को दूर करने के कई रास्ते भी होते हैं। कुछ लोग सही समय पर सही रास्ता चुन लेते हैं और वे सफलता के पथ पर आगे बढ़ जाते हैं। वहीं कुछ लोग सब कुछ भाग्य या नियति के भरोसे छोड़कर बैठ जाते हैं, जीवनभर दुखी होते रहते हैं।
बुद्धिमान इंसान वही है जो उन विकल्पों को पहचानकर, उनमें से सही विकल्प चुन लेता है। सबकुछ नियति के भरोसे छोड़कर बैठने वाले इंसान सदैव कष्ट और दुख के ही प्रतिभागी बन जाते हैं। ऐसे लोग जीवन में ना तो कुछ बन पाते हैं और ना ही कोई इतिहास बना पाते हैं। इसीलिए समझदारी इसी में है कि सही समय पर सही रास्तों को पहचाना जाए और उन रास्तों पर बिना समय गंवाए आगे बढ़ा जाए।
मूर्ख व्यक्ति के सामने ज्ञान की किताबों का ढेर लगा देने से भी वह उनसे कुछ भी ग्रहण नहीं कर पाएगा।  किसी मूर्ख व्यक्ति के लिए किताबें मूल्यहीन ही है और किताबों में लिखी ज्ञान की बातें फिजूल होती हैं। अत: किसी भी मूर्ख व्यक्ति को समझाने में अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। 
इस बात को व्यक्त मत होने दीजिए कि आपने क्या करने के लिए सोचा है, बुद्धिमानी से अपनी योजना का रहस्य बनाए रखिए और लक्ष्य की ओर चुपचाप बढ़ते रहें। अपनी योजनाएं किसी ओर पर जाहिर होने के बाद वह आपके क्षति भी पंहुचा सकते हैं और लक्ष्य तक पहुंचने में आपके लिए मुश्किल अवश्य बढ़ जाएंगी। इस बात का सदैव ध्यान रखें।
यदि कोई व्यक्ति समझदार या विद्वान न हो तब भी उसे दूसरों के सामने समझदार बने रहना चाहिए। 

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