Friday, 30 January 2015

बाल श्रम ,समाज और सरकार एक दुशरे से सम्बंधित हे लेकिन सरकार और समाज की नाक के निचे ही बहुत से बच्चे अपना पेट भरने के लिए काम करते हे बस कानून और अनुदान पाने के लिए बाल श्रम का रोना रोते  हे कोई कठोर कानून नहीं हे घर वाले क्या करे ,जब  खाने को दाने नहीं तो क्या करे ? मजबूरी में बच्चो को मजदूरी करनी पड़ती हे ,सब जानते हे की बच्चो से काम यानि मजदूरी नहीं करवानी चाहिए ,फिर भी आपको ये बच्चे काम करते हुए सब तरफ मिल जायंगे ,एक बार देखते हे ,मन मसोस कर रह जाते हे ,ये लोग ही अपने बच्चो को कुछ भी काम नहीं करने देते ,जब तक दोगलापन रहेंगा ,कुछ नहीं हो सकता ,क्योकि पेट भरने के लिए कुछ तो करना पड़ेंगा

राम नरेश गुप्ता विवेक विहार सोडाला जयपुर 

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