भारतीय रेलें दिन भर में जितनी दूरी तय करती हैं, वह धरती से चांद के बीच की दूरी का लगभग साढ़े तीन गुना है।
भारतीय रेलवे में लगभग 16 लाख लोग काम करते हैं। यह दुनिया का 9वां सबसे बड़ा एंप्लॉयर है। यह आंकड़ा कई देशों की आबादी से भी ज्यादा है।
भारतीय रेल से रोज करीब 2.5 करोड़ लोग यात्रा करते हैं। यह संख्या ऑस्ट्रेलिया की कुल जनसंख्या के लगभग बराबर है।
मेतुपलयम ऊटी नीलगिरी पैसेंजर ट्रेन भारत में चलने वाली सबसे धीमी ट्रेन है। यह लगभग 16 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है। कहीं-कहीं पर तो इसकी स्पीड 10 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो जाती है। आप चाहें तो आराम से इसकी खिड़की से कूदकर कुछ देर इधर-उधर टहलकर, वापस इसमें आकर बैठ सकते हैं।
हावड़ा-अमृतसर एक्सप्रेस सबसे ज्यादा जगहों पर रुकने वाली एक्सप्रेस ट्रेन है। इसके 115 स्टॉपेज हैं। क्यों, आ गया न चक्कर देश की सबसे लेट लतीफ ट्रेन गुवाहाटी-त्रिवेंद्रम एक्सप्रेस है। यह ट्रेन औसतन 10-12 घंटे लेट होती है। नई दिल्ली के मेन स्टेशन के नाम दुनिया के सबसे बड़े रूट रिले इंटरलॉकिंग सिस्टम का रेकॉर्ड है। यह उपलब्धि गिनेस बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड्स में भी दर्ज है।
भारतीय रेलवे में लगभग 16 लाख लोग काम करते हैं। यह दुनिया का 9वां सबसे बड़ा एंप्लॉयर है। यह आंकड़ा कई देशों की आबादी से भी ज्यादा है।
भारतीय रेल से रोज करीब 2.5 करोड़ लोग यात्रा करते हैं। यह संख्या ऑस्ट्रेलिया की कुल जनसंख्या के लगभग बराबर है।
मेतुपलयम ऊटी नीलगिरी पैसेंजर ट्रेन भारत में चलने वाली सबसे धीमी ट्रेन है। यह लगभग 16 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है। कहीं-कहीं पर तो इसकी स्पीड 10 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो जाती है। आप चाहें तो आराम से इसकी खिड़की से कूदकर कुछ देर इधर-उधर टहलकर, वापस इसमें आकर बैठ सकते हैं।
हावड़ा-अमृतसर एक्सप्रेस सबसे ज्यादा जगहों पर रुकने वाली एक्सप्रेस ट्रेन है। इसके 115 स्टॉपेज हैं। क्यों, आ गया न चक्कर देश की सबसे लेट लतीफ ट्रेन गुवाहाटी-त्रिवेंद्रम एक्सप्रेस है। यह ट्रेन औसतन 10-12 घंटे लेट होती है। नई दिल्ली के मेन स्टेशन के नाम दुनिया के सबसे बड़े रूट रिले इंटरलॉकिंग सिस्टम का रेकॉर्ड है। यह उपलब्धि गिनेस बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड्स में भी दर्ज है।
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