Monday, 4 January 2016

जबसे सरकार में निःशुल्क दवा मिलने लगी हे ,आम इंसान का इलाज़ और भी दुर्लभ हो गया हे डॉक्टर तो इतने अच्छे हे की मरीज मरे या ना ,उनको अपने काम से मतलब हे,
निःशुल्क इलाज़ में सबसे पहले आप पांच रुपए लेकर लाइन में लग कर पर्ची बनवाओ ,सीनियर सिटीजन की फ्री में लेकिन लाइन में तो लगना ही होगा ,जिसके पास खुल्ले नहीं हो तो दान कर के आओ बाकि पैसे ?
फिर पर्ची लेकर डॉक्टर को दिखाओ ,,,,वो ले दे कर कुछ सरकारी दवा लिख  देंगा ,कुछ फ्री जांच। जो दवाई जरूरत की हे वो लिखेंगा नहीं क्योकि मरीज अपने आप में सैंपल हे तीन बाद फिर जाओ ,ठीक हो जाओ तो आपकी किस्मत ,,नहीं तो उसी डॉक्टर के पास या उसके किसी दूसरे भाई के पास जाओ ,
फिर ये सिलसिला चलता रहता हे मरीज और उसके परिजन फूटबाल की तरह घूमते रहो ,साथ में धन की बर्बादी भी ,कोई गारंटी नहीं की इनसे इलाज़ हो जाए ,
सरकार में बैठे मंत्री ,अफसर और चापलूसों का इलाज़ ये कसाई रुपी डॉक्टर तुरंत कर देते हे कीकोई पद का डर हे की कही टार्न्सफ़र ना कर दे
गरीबो की योजना का पूरा खर्च ले दे कर कुछ लोगो पर ही खत्म करके इतिश्री कर लेते ही।

राम नरेश गुप्ता विवेक विहार सोडाला जयपुर 

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