Sunday, 3 January 2016

राज्य के आला अधिकारी ने प्रमोशन के लिए दलित और धर्म को जोड़ दिया ,लगता हे दलित के कारन ही ये जनाव इतने बड़े पद पर जा बैठे तब कहा थे ये उस्ताज जी ?
ये महाशय इतना सब कुछ करने के बाद भी गूंगी बहरी और अंधी सरकार ने इनके खिलाफ आज तक कोई कार्यवाही नहीं की ,क्या मिली भगत हे ?
इस मसले पर कांग्रेस पार्टी तो दो हिस्सों में बात गयी एक सही कह रहा हे दुसरा गलत ,,,लेकिन लगता हे ये लोग वोट की राजनीती खेल रहे हो ?
सत्ता धरी पार्टी तो तिर छोड़ कर सो गयी या किसी अन्य अवसर का इंतज़ार ?
सबसे बड़ी बात जो अफसर इससे पीड़ित था बो खेलने बाहर  गया ,और उसके हिमायती या विरोधी उलझ रहे हे की क्या सही हुआ या गलत /?

अब आप सब बुद्धि जीवी बताओ की क्या सही और गलत ?

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